Martyrdom of Guru Teg Bahadur
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तिलक जंञू राखा प्रभ ता का ॥ कीनो बडो कलू महि साका ॥ साधन हेति, इती जिनि करी ॥ सीसु दीया, परु सी न उचरी ॥१३॥ धरम हेत साका जिनि कीआ ॥ सीसु दीआ; परु सिररु न दीआ ॥ नाटक चेटक कीए कुकाजा ॥ प्रभ लोगन कह आवत लाजा ॥१४॥
दोहरा ॥ ठीकर फोरि दिलीस सिरि; प्रभ पुरि कीया पयान ॥ तेग बहादुर सी क्रिआ; करी न किनहूं आनि ॥१५॥
तेग बहादुर के चलत; भयो जगत को सोक ॥ है है है सभ जग भयो; जै जै जै सुर लोकि ॥१६॥
गुरु गोबिंद सिंह जी